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Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.

पूर्ण शराबबंदी : बिहार में शराब से जुड़े सभी अपराध गैरजमानती

राज्य में लागू शराबबंदी कानून आनेवाले समय में अधिक सख्त होगा. इसके लिए उत्पाद एवं मद्य  निषेध विभाग ने नये उत्पाद विधेयक-2016 में कई स्तरों पर महत्वपूर्ण संशोधन  किये हैं.
संबंधित प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी मिलने जा  रही है. इसके बाद इसे 29 जुलाई से शुरू होने जा रहे विधानमंडल के मॉनसून  सत्र में पेश किया जायेगा. विधानमंडल के दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के  बाद नया शराबबंदी कानून अधिक सख्ती से पूरे राज्य में लागू हो जायेगा.    

नये उत्पाद कानून में कई स्तरों पर विशेष बदलाव किये गये हैं. अब शराब से  जुड़ी किसी तरह की गतिविधि को पूरी तरह से अपराध की श्रेणी में रखा गया है.  इसके तहत अगर कोई व्यक्ति शराब से जुड़ी किसी तरह की गतिविधि में पकड़ा  जाता है, तो वह पूरी तरह से गैरजमानती होगा. अब कोई व्यक्ति किसी दूसरे  राज्य या स्थान से शराब पीकर यहां आ जाता है, तब भी उसे उतना ही दोषी माना  जायेगा, जितना राज्य में शराब पीये हुए पकड़ा जाता है. इस अपराध को गैरजमानती श्रेणी में शामिल किया गया है.    शराब से जुड़ी किसी  तरह की गतिविधि को अपराध से अलग करके नहीं रखा गया है. राज्य में शराब मतलब  सीधा अपराध हो जायेगा. शराब की किसी तरह की बरामदगी, उपयोग,  ट्रांसपोर्टेशन समेत अन्य किसी तरह के क्रियाकलापों को गैरजमानती अपराध  की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया गया है. यहां तक कि अगर किसी के घर  में शराब रखी भी पकड़ी जाती है, तब भी वह गैरजमानती श्रेणी का अपराध माना  जायेगा.    शराब से जुड़े मामलों की सुनवाई के  लिए विशेष अदालत का गठन और  उत्पाद दारोगा को कई स्तर पर अधिकार बढ़ाने समेत  अन्य बातें भी जुड़ी हुई  हैं.   क्यों पड़ी जरूरत : पांच अप्रैल से पूर्ण शराबबंदी की घोषणा की  गयी थी. इसके लिए बिहार उत्पाद अधिनियम-1915 को संशोधित करके उत्पाद  (संशोधन) अधिनियम-2016 लागू किया गया. लेकिन, तीन महीने के दौरान इस नये  विधेयक में कई बातों पर फिर से संशोधन करने की जरूरत महसूस की गयी.   

हाल  में पटना हाइकोर्ट ने घर में शराब पकड़े जाने के दो-तीन मामलों में लोगों  को जमानत दे दी थी. इसके  मद्देनजर नये उत्पाद कानून में इन बातों को भी  संशोधित करके जोड़ दिया  गया है. शराबबंदी मतलब पूरी तरह से बंद, किसी  व्यक्ति का इससे किसी तरह का  कोई सरोकार नहीं होगा, नये संशोधन में इन  बातों का ध्यान रखा गया है. इसके  बाद फिर से संशोधन किया जा रहा है.  

उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने प्रस्ताव को किया तैयार   ये अपराध भी गैरजमानती   शराब की किसी तरह की बरामदगी, उपयोग,  ट्रांसपोर्टेशन समेत अन्य किसी तरह के क्रियाकलाप अगर किसी के घर  में शराब रखी भी पकड़ी जाती है, तब भी वह गैरजमानती अपराध माना जायेगा अभी औसतन 52 दिनों में मिल रही जमानत   पांच अप्रैल से पांच जुलाई के बीच 6435  पर एफआइआर दर्ज की गयी, जिनमें 6314 को जेल भेजा जा चुका है. इनमें 447 को अब तक जमानत मिल चुकी है. औसतन 52 दिनों में लोगों को जमानत मिल रही है. आनेवाले दिनों में इस कानून को ज्यादा सख्त किया जायेगा.  

गांवों में मोटरसाइकिल दस्ता मारेगा छापे पटना : राज्य में शराबबंदी को पूरी सख्ती से लागू करने के लिए कई स्तरों पर चौकसी बढ़ायी जा रही है. ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में अवैध शराब के कारोबारियों को पकड़ने के लिए अब मोटरसाइकिल दस्ता तैयार किया गया है. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ने यह नयी पहल की है. 15 दिनों में यह विशेष दस्ता काम करने लगेगा. इसके लिए फिलहाल 194 मोटरसाइकिलों की व्यवस्था की जा रही है.  

यह जानकारी उत्पाद आयुक्त कुंवर जंग बहादुर ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी. उन्होंने कहा कि इस दस्ते में फिलहाल विभाग के ही सिपाही और दारोगा को शामिल किया गया है. आनेवाले समय में ऐसी व्यवस्था पुलिस महकमे के लिए भी की जायेगी. वर्तमान में यह प्रयोग रेल पुलिस में किया गया था, जो काफी सफल रहा.   उन्होंने कहा कि यह दस्ता संकीर्ण और बेहद दुर्गम रास्तों के जरिये भीतरी इलाकों में जाकर अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम साबित होते हैं. नशामुक्त बिहार के अभियान को कारगर बनाने के लिए एक पोर्टल भी तैयार किया गया है, जिसमें मद्य निषेध की सारी सूचनाएं अपलोड की गयी हैं. इससे आम लोगों को सभी तरह की जानकारियां मिल सकती हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 428 डिजिटल लॉक की बिक्री हो चुकी है. 1751 वाहनों में यह लॉक लगाये जा चुके हैं. उत्पाद सामग्री लेकर राज्य होकर गुजरनेवाली सभी वाहनों में लॉक लगाने का काम शुरू हो गया है.  शराब की जांच के लिए मशीन का उपयोग   शराबियों की जांच के लिए 289 ब्रेथ एनालाइजर उपलब्ध हैं.

सभी सीमावर्ती जिलों में छह-छह मशीनें दी गयी हैं. ब्रेथ एनालाइजर मशीन के साथ 50-50 पाइप भी दिये गये हैं, जिसका उपयोग अलग-अलग लोगों की जांच करने के लिए किया जाये.  सभी जिलों में दो-दो वकील तैनात   सभी जिलों में उत्पाद से जुड़े मामलों की मॉनीटरिंग करने और इसके मुकदमे को लड़ने के लिए कम-से-कम दो वकील तैनात कर दिये गये हैं. बड़े जिलों में चार वकील तैनात किये गये हैं. साथ ही बड़े जिलों में दो स्पेशल लोक अभियोजक और छोटे जिलों में एक स्पेशल लोक अभियोजक की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश विभाग ने डीएम को दिया है.

इससे शराब के मामलों में फंसे आरोपितों की जमानत जल्द नहीं होने और ऐसे मामलों की सशक्त मॉनीटरिंग करने में काफी सहायता मिलेगी.   बिहार से सटे झारखंड के जिलों में शराब से राजस्व 40 प्रतिशत बढ़ा रांची (विवेक चंद्र) : बिहार में शराबबंदी झारखंड सरकार का खजाना बढ़ा रही है. बिहार से लगे झारखंड के सीमावर्ती जिलों में शराब की बिक्री में जबरदस्त इजाफा हुआ है. पिछले वर्ष की तुलना में बिहार से सटे झारखंड के सीमावर्ती जिलों ने शराब से रिकाॅर्ड राजस्व वसूली की है.    झारखंड के 10 जिले बिहार की सीमा छूते हैं. इन सीमावर्ती जिलों को शराब से मिलनेवाले राजस्व में 40.36 प्रतिशत का इजाफा हुआ है.

सीमावर्ती      जिलों में पिछले साल अब तक शराब से 1900.89 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया था. वहीं, इस साल अब तक 2667.90 लाख रुपये राजस्व मिल चुका है.


बिहार सरकार ने बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 अधिसूचित किया

बिहार सरकार ने 2 अक्टूबर 2016 को बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 को अधिसूचित किया. अधिसूचित किए गए नए शराब प्रतिबंध क़ानून में कम से कम 1 लाख रुपये का जुर्माना के साथ 7 साल के लिए जेल का भी प्रावधान है. 

पटना उच्च न्यायालय द्वारा शराब की खपत पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को खारिज कर देने के दो दिन बाद राज्य सरकार ने कैबिनेट की विषेश बैठक में अधिसूचना जारी की. बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की.

राज्य सरकार ने शराबबंदी पर अमल हेतु क़ानून में कड़े बदलाव किए हैं. राज्य सरकार ने पटना उच्च न्यायालय के आदेश आबकारी अधिनियम में संशोधन से संबंधित अधिसूचना के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने फैसला किया है.

बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम, 2016 के कुछ प्रावधान-

नए कानून के तहत गांवों में पूर्ण शराबबंदी की जाएगी यानि देशी और विदेशी दोनों तरह की शराब की बिक्री पर रोक रहेगी.

शहरी क्षेत्रों के चुनिंदा इलाकों की करीब 650 सरकारी दुकानों में सिर्फ़ विदेशी शराब की बिक्री की जाएगी.

पटना नगर-निगम क्षेत्र में शराब बेचने की 90 सरकारी दुकानें खोली जाएंगी.

बिहार सरकार को इस फ़ैसले के कारण साल में दो हज़ार करोड़ रुपए से अधिक के उत्पाद शुल्क का नुक़सान होगा.

बिहार सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक सरकार को देशी शराब की बिक्री से 2015-16 के वित्तीय वर्ष में 2,159 करोड़ रुपए उत्पाद शुल्क के रूप में मिले.

नए क़ानून में अवैध शराब की बिक्री रोकने हेतु कई कड़े प्रावधान किए गए हैं, ज़हरीली शराब पीने से मौत होने पर शराब बनाने और बेचने वालों को मौत की सजा का प्रावधान भी हो सकता है.

विदेशी शराब की लाइसेंसी दुकानों में बची अंग्रेज़ी शराब को सरकार ज़ब्त कर लेगी और जांच के बाद उसकी कीमत दुकानदारों को वापस करेगी.

देशी शराब के स्टॉक को जिला प्रशासन नष्ट कर देगा, इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी.

उत्पाद और मद्य निषेध विभाग ने शराबबंदी से जुड़ी शिकायतों को दर्ज करने के लिए दस टेलीफोन लाइनों वाला एक कॉल सेंटर शुरू किया.

बिहार पुलिस का भी एक कंट्रोल रूम खास तौर पर शराबबंदी सुनिश्चित करने के लिए उत्पाद विभाग के कॉल सेंटर के साथ काम करेगा.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी जिलों में 50 बेड वाला डिएडिक्शन सेंटर (नशा मुक्ति केंद्र) खोलने की योजना है.

यहां खास तौर पर प्रशिक्षित डाक्टर तैनात किए जाएंगे, इन केंद्रों पर ज़रूरी दवा के साथ-साथ काउंसिलिंग का भी इंतज़ाम रहेगा.

शराब बनाने के लिए कच्चा माल और तैयार शराब की ढुलाई करने वाले टैंकरों में जीपीएस सिस्टम से लैस डिजिटल लॉकर लगाना ज़रूरी कर दिया गया है.

राज्य से होकर दूसरे राज्यों में जाने वाले ऐसे वाहनों का टैंक बिहार में प्रवेश करते ही लॉक कर दिया जाएगा. जिसे पड़ोसी राज्य की सीमा पर ही खोला जा सकेगा.

इन वाहनों के लिए चौबीस घंटे के अंदर बिहार की सीमा से निकलना भी आवश्यक कर दिया गया है.

बिहार सरकार ने उन राज्यों से शराबबंदी में सहयोग मांगा है जिनकी सीमा बिहार से लगती है.

बिहार सरकार ने खासकर झारखंड और उत्तर प्रदेश से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि उनके यहां से देशी शराब और इसे बनाने का कच्चा माल अवैध तरीक से बिहार न पहुंचे.

शिक्षा विभाग स्कूली बच्चों, खासकर सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के पिता से यह शपथपत्र ले रही है कि वे शराब का सेवन नहीं करेंगे, अब तक ऐसे करीब 94 लाख शपथपत्र सरकारी स्कूलों में जमा हुए हैं.

शराबबंदी को सुनिश्चित करने हेतु उत्पाद विभाग अपने पुलिस बल को और मजबूत कर रहा है.

विभाग ने 854 उत्पाद सिपाहियों की बहाली के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड को लिखा है.

साथ ही विभाग ने गृह विभाग से दो हजार अतिरिक्त सैफ (विशेष सहायक बल) जवानों और चार हजार अतिरिक्त होम गार्ड जवानों की मांग की है. इसके अतिरिक्त विभाग गंगा सहित सूबे की बड़ी नदियों पर वाटरबोट से और सघन निगरानी करेगा.

बिहार उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक अधिनियम, 2016 पूर्व में लागू  बिहार मद्य निषेध अधिनियम,1915 और मद्य निषेध अधिनियम 1938 का स्थान लेगा. जिसके तहत निर्माण, बिक्री, भंडारण और शराब की खपत को प्रतिबंधित कर दिया गया है.

बिहार उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक अधिनियम, 2016 के लागू होने के बाद निर्माण, बॉटलिंग, वितरण, परिवहन, संग्रह, भंडारण, कब्जे, बिक्री और शराब या किसी अन्य नशा राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट की खपत पर निषेध लगाता है.

राज्य सरकार ने मौजूदा लाइसेंस को नवीनीकृत, या किसी भी राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी (जैसे निर्माण, वितरण, आदि) के रूप में इन गतिविधियों के किसी भी शुरू करने की अनुमति देने के लिए अनुमति देता है.


मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना: बिहार

मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना
अपने देश में अब भिखमंगेपन ने एक सुव्यवस्थित व्यवसाय का रूप धारण कर लिया है. पिछली राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार हमारे देश में 56 लाख व्यक्ति भिक्षा मांगने का व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहे हैं. इसमें असमर्थ एवं अधर्मों की संख्या एक लाख से भी कम है, सभी इस योग्य है कि अपनी आजीविका अपने श्रम द्वारा उपार्जित कर सकें, किन्तु वे करते नहीं. बड़े शहरो में इस व्यवसाय को अनेक गिरोह संचालित कर रहे है. जो बच्चो से बलात यह व्यवसाय कराया जा रहा है.

देश में बेरोजगारी और अपंगता के कारण अनेक लोग अपना जीवनयापन करने की स्थिति में नहीं है. इनका देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है, इस कारण इन लोगो के सामने भिक्षा मांगने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है. मंदिरों, गिरिजाघरो, गुरुद्वारों और मस्जिदों के पास ये लोग भिक्षा मांगने का कार्य करते है. हमारे देश में ऐसे लोगो की मदद करना धर्म आधारित कार्य माना जाता है किन्तु साक्षरता बढ़ने के कारण लोगो की भिक्षा देने की प्रवर्ती कम होते जा रही है और ऐसा कार्य करने वालो को हेय दृष्टी से देखा जाता है, अनेको बार तो इन्हें बुरी तरह से प्रतारित भी किया जाता है. बिहार सरकार ने इनकी वेदना को समझा और इनको इस काम से मुक्त कर इनके पुनर्वास का संकल्प लिया है. बाकायदा इनके लिए योजना और योजना के आधारभूत ढाचा भी तैयार किया गया है.

The unemployment and disability are the cause for begging. The poor’s can’t manage the food for the living. The begging is only the alternative with these peoples. These people will meet near the Temples, Churches, and Mosques & Gurudwara. As per the dharma said to help these people, due to literacy this work is not acceptable to the majority of the peoples, they ignore the baggers and not behaved properly. The government of Bihar takes it seriously and a scheme has launched for the baggers.

The main object of the scheme is

1. Provide the medicine & treatment to the peoples.

2. Rehabilitee the people in the good atmosphere and arranges training for the peoples so that they can get the job.

मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना का मुख्य उद्देश्य है बिहार राज्य में भिक्षावृत्ति की कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और इस कार्य में लगे लोगो का पुनर्वास करना है.

इस योजना के अंतर्गत
In the scheme

1. इस हेतु स्थापित संचालनालय निराश्रितों और विशेषकर वृद्धजनों के पुनर्वास के लिए चिकित्सा और अन्य सुविधाओं के साथ आश्रय गृह स्थापित करता है.
Established the directorate for rehabilitation of baggers, the priority will given to shelter less and aged people. 

2. यह योजना युवा भिक्षावृत्ति करने वालों का पुनर्वास भी करती है. पटना में प्राथमिकता के आधार पर पहला कदम रखने के बाद अब इन कार्यकलापों का चरणबद्ध तरीके से सभी संभागो और जिला मुख्यालयों में विस्तार किये जाने की योजना है.
The scheme rehabilitee the baggers, the scheme are started in Patna, for benefits of the scheme identify the baggers, the scheme will extend to all the division and the district of the state. 

योजना की स्थिति:
इस योजना का कार्यान्वयन पटना ज़िले में किया जा रहा है जिसके अंतर्गत पुनर्वास के लिए 1,680 भिक्षावृति लगे लोगो को चिन्हित किया गया है. इस योजना को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है, शैने: शैने: इस योजना को प्रदेश के सभी क्षेत्रो में प्रारंभ किये जाने का योजना में प्रावधान है.

The execution of the scheme has started in Patna & 1680 baggers identify for the scheme. This is the pilot project of the scheme, after seeing the result the scheme will be extended to all parts of the state. 

इस योजना के लाभ और पात्रता

(i) इस योजना का उद्देश्य भिक्षावृत्ति करने वालों को भिक्षावृत्ति से अलग करना और उनका पुनर्वास करना है.
The main object of the scheme is to prevent the bagging in the state. The baggers will rehabilitee by the scheme.

(ii) अति गरीब व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए स्टेट सोसाइटी फॉर रीहैबीलिटेशन ऑफ़ अल्ट्रा पूअर की स्थापना की गई है.
For the rehabilitation of the poorest the state society for rehabilitation of ultra, poor is established in the state. 

(iii) अति गरीब लोगों में निःशक्त व्यक्ति व भिखारी आते हैं.
The beneficiaries of the scheme will be poorest and disable person.

(iv) वर्तमान समय में संयुक्त निदेशक, सामाजिक सुरक्षा और निःशक्तता परियोजना अधिकारी, परियोजना सेल की भूमिका निभाएंगे स्टेट सोसाइटी फॉर रीहैबीलिटेशन ऑफ़ अल्ट्रा पूअर के अन्य पदों के लिए विज्ञापन निकाल कर कुल पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की गयी है.
At present the Joint Director social security’s will responsible to execute the scheme. The appointments of staff on contract basis are made for society for rehabilitation of ultra poor.


इसके साथ गैर सरकारी संस्था 'मेधा' का चुनाव भी कर लिया गया है, यह संस्था भिखारियों का सर्वेक्षण करेगी. जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी अंत में भिखारियों के नामों का चुनाव करेगी. इस कमेटी के सदस्य गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, निःशक्त क्यक्ति व ज़िला मजिस्ट्रेट होंगे. पुनर्वास के लिए एक त्रिस्तरीय मॉडल निर्धारित किया गया है. इस माडल में सुझाव और पुनर्वास, कौशल विकास और स्वरोज़गार के अवसर को शामिल किया गया है.

The MEDHA NGO is selected for the survey of the baggers. A committee established for the selection of the beneficiaries. The committee will consist of the representatives of the non organization institute; disable persons and the district magistrate. 

सदस्यता

इस योजना का कार्यान्वयन करने के उद्देश्य से 'अत्यंत निर्धनों के पुनर्वास हेतु बिहार राज्य सोसाइटी' का पंजीकरण किया गया है. भिक्षावृत्ति करने वालों और 'अत्यंत निर्धनों' या निराश्रितों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और चिकित्सीय सहायता के लिए पटना में एक अस्पताल को नोडल अस्पताल के रूप में चिन्हित किया गया है. भिक्षावृत्ति करने वालों के पुनर्वास की प्रक्रिया में साझेदारी हेतु गैर-सरकारी संस्थाओं को चिन्हित किया गया है. इन संस्थाओ की भिक्षुको के पुनर्वास में सहायता ली जाएगी.
To execute the scheme a society (Bihar state society for the rehabilitation of poorest, shelter less peoples.) is registered. The society will provide the medical examination medicine free of cost. 

भिक्षा मांगने वाले लोगो की आर्थिक अवस्था के बारे में अध्ययन किया गया और इन्हें 6 वर्गों में बाटा गया,

1. पहली श्रेणी उन लोगों की है जो गंभीर शारीरिक अस्वस्थता, असाध्य रोगों, विकलांगता के साथ ही गरीबी से पीड़ित हैं और जीवित रहने के लिए उनके पास कोई और कोई विकल्प नहीं है.

2. दूसरी श्रेणी में वे बूढ़े और असहाय लोग हैं, जिन्‍हें परिवारों से निकाल दिया गया है. इनके पास न रहने का कोई इंतजाम है और नाही खाने की कोई व्यवस्था की गयी है.

3. तीसरी श्रेणी में ऐसे बेरोजगार शामिल हैं, जो पूरी तरह निराश हो चुके हैं और जिनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है.ये बेरोजगार जीवन से निराश हो चुकने के कारण कोई काम करने की स्थिति में नहीं है.

4. चौथी श्रेणी में भिक्षावृत्ति करने वाले ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने इसे अपना धंधा बना रखा है और बिना कुछ और किए, इसे ही अपनी कमाई का साधन मानते है. ऐसे लोग दया के पात्र नहीं ये लखपति गरीब है. एक समाचार पत्र में पढ़ा था कि ऐसे भी गरीब है जो भिक्षा मांगकर इससे मिली राशी ब्याज पर देते है.

5. पांचवी श्रेणी में ठगी करके, पैसा इकट्ठा करने की कोशिश करने वाले लोग हैं. भिक्षा के माध्यम से ठगी या चोरी के ठिकानो का पता लगाकर इन स्थानों पर चोरी करते है.

6. और छठी श्रेणी में असामाजिक तत्वों के चंगुल में फंसे ऐसे लोग हैं, जिनसे अलग-अलग स्थानों पर, नियंत्रित ढंग से भीख मंगवाई जाती है और अपराधी तत्व, उस भीख का बहुत थोड़ा हिस्सा, उन भीख मांगने वालों को दे देते हैं. यह एक बड़ा गिरोह है जो देश के सभी स्थानों पर काम कर रहा है.

बिहार सरकार ने गंभीरता से व्यावहारिक कदम उठाए और भिक्षावृत्ति को राज्य से समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है इससे सामाजिक बदलाव आएगा और बिहार में में सार्वजनिक स्थानों पर, हाथ फैलाए हुए खड़े लोगों की समस्या भी हल की जाएगी , इस दिशा में कदम उठाए कर बिहार सरकार ने अपने सामाजिक दायित्व को निभाया है.

As per the study, the baggers has divided into six groups
1. The baggers having disability, disease not curable, physical illness & living poorest life comes in the category.

2. The old having no shelter, the family left, they have no house and arrangements of foods, comes in the category.

3. The unemployed not getting the job becomes hopeless to the system, hence can’t do any works can place in the category.

4. Some baggers make bagging as profession, & doing the business by the bagging., These baggers are a lot of amount with them they giving it as a loan to the persons & taking interest on it. They are rich baggers. 

5. By bagging, they search the places for theft & in night they makes theft incident,

6. Some baggers doing bagging by force. Such groups are active in the society. They kept low age boys and force them for bagging.

The bagging is shameful for the society. The Bihar government launched the scheme for their welfare. It’s a good for baggers.





भिक्षावृत्ति बिहार -2

पहले बात करें बिहार की, जहां राजनेता विकास की बात करते नहीं थकते। मगर उसी बिहार में समाज कल्याण विभाग ने भीख मांगने वालों का सर्वेक्षण (2014) कर जो तथ्य उजागर किया है वह चकित कर देने वाला है।

सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि बिहार में भिक्षावृत्ति अपनाने वालों में ऊंची जाति के शिक्षित, यहां तक कि स्नातक उपाधिधारी भी सम्मिलित हैं। यद्यपि भीख मागने वाले अधिकतर महादलित है।

पटना में 2206भिक्षारियों की पहचान की गई। इनमें 1100भिक्षुओं के आधार पर जो आंकड़ा सामने आया उसमें स्नातक एक प्रतिशत, इण्टरमीडिएट तीन से चार प्रतिशत और बड़ी संख्या में साक्षर पाए गए।

सर्वेक्षण के अनुसार, गया जिले में 2356 भिक्षुक पाए गए। जिनमें सामान्य जाति के 80, पिछड़ी जाति के 235, दलित 367 व महादलित 1674 हैं। इनमें 95 प्रतिशत हिन्दू तथा 5 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं।

भीख मांगने वालों में स्त्रियों की संख्या 64 प्रतिशत और पुरुषों की संख्या 34 प्रतिशत है। इस अमानवीय कार्य को रोकना नितान्त आवश्यक है पर अभी तक किसी सरकार के एजेण्डे में इसका समावेश दिखाई नहीं देता।


भिक्षावृत्ति भारत

2011 की जनगणना रिपोर्ट बताती है कि देश में तीन लाख बहत्तर हजार भिखारी थे, जिनमें से 21 फीसद यानी 78 हजार भिखारी शिक्षित थे।

अर्द्धबेरोजगारी और अपर्याप्त मेहनताने ने भी लोगों को भीख मांगने के लिए मजबूर कर रखा है। कई महानगरों में पढ़े-लिखे लोग भीख मांगते पकड़े गए हैं।

शिक्षित भिखारियों में से कई के पास प्रोफेशनल डिग्री थी। जनगणना रिपोर्ट में उक्त आंकड़े कोई रोजगार न करने वाले और उनका शैक्षिक स्तर शीर्षक तले जारी की गई।

शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में भिखारियों की संख्या कहीं ज्यादा है। शहरी इलाकों में भीख मांगने वालों की संख्या एक लाख पैंतीस हजार है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह संख्या दो लाख सैंतीस हजार है।

पिछले दिनों केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि देश में भिखारियों की संख्या चार लाख तेरह हजार छह सौ सत्तर है, जिनमें पुरुषों की संख्या दो लाख बीस हजार और महिलाओं की संख्या एक लाख इक्यानबे हजार है। जाहिर है, तमाम प्रयासों के बावजूद भिखारियों की वास्तविक संख्या को लेकर भ्रम की स्थिति अब भी बरकरार है।

सरकार की ओर से राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब को आधार बनाते हुए राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो सबसे ज्यादा भिखारी पश्चिम बंगाल में हैं।

देश के बाईस राज्य और केंद्रशासित शासित प्रदेश भिक्षावृत्ति के खिलाफ कानून बना चुके हैं। उत्तर प्रदेश में म्युनिसिपेल्टी एक्ट भिक्षावृत्ति का निषेध करता है। जबकि पंजाब-हरियाणा में भिक्षावृत्ति निरोधक अधिनियम 1971 लागू है।

मध्य प्रदेश में 1969-1973, मुंबई में 1945, पश्चिम बंगाल में 1943 में बने कानून लागू हैं। इसके अलावा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 भी कहती है कि जो व्यक्ति भीख मांगने के लिए अनुचित प्रदर्शन करते पाए जाएंगे, वे दंड के भागी होंगे। भारतीय रेलवे अधिनियम भी भिक्षावृत्ति का निषेध करता है।

भिखारियों में बच्चों की तादाद भी अच्छी-खासी है। हालांकि, इस बाबत कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है, लेकिन एक अनुमान के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में तकरीबन दो लाख से ज्यादा बच्चे भिक्षावृत्ति से जुड़े हैं। कोई पारंपरिक रूप से भिक्षावृत्ति कर रहा है, कोई मजबूरी के चलते। वहीं बड़ी संख्या में बच्चे संगठित गिरोहों का शिकार हैं, जो उन्हें डरा-धमका कर, अंग-भंग करके उनसे भिक्षावृत्ति करा रहे हैं। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग-(एनसीपीसीआर) बच्चों से भिक्षावृत्ति कराने की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए राजधानी दिल्ली से एक देशव्यापी मुहिम शुरू करने जा रहा है।

गौरतलब है कि संशोधित किशोर न्याय कानून-2015 में बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं।

आयोग के सदस्य यशवंत जैन कहते हैं कि बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए संशोधित कानून का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।

संशोधित कानून की धारा 76 के तहत बाल भिक्षावृत्ति के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को पांच साल की कैद और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

बच्चों का अंग-भंग करके उनसे भिक्षावृत्ति कराने के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को सात से दस साल की कैद और एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। बाल भिक्षावृत्ति एक राष्ट्रीय समस्या है, लेकिन शहरों में इसे पेशेवर ढंग से अंजाम दिया जा रहा है। आयोग चिल्ड्रेन हेल्पलाइन, गैर सरकारी संगठनों और प्रशासन के साथ मिलकर बाल भिक्षावृत्ति पर अंकुश लगाने का प्रयास करेगा।

मुहिम के तहत न सिर्फ बच्चों को भिक्षावृत्ति के दलदल से निकाला जाएगा, बल्कि उनके पुनर्वास की भी योजना है।

विभिन्न शिक्षाशास्त्रियों-समाजशास्त्रियों का मत है कि भिक्षावृत्ति की समस्या के मूल में सबसे बड़ी वजह गरीबी और बेरोजगारी है। शिक्षित भिखारियों की भारी-भरकम संख्या इसकी गवाह है। यानी अर्द्धबेरोजगारी और अपर्याप्त मेहनताने ने भी लोगों को भीख मांगने के लिए मजबूर कर रखा है। कई महानगरों में पढ़े-लिखे लोग भीख मांगते पकड़े गए हैं।

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई डांस बार प्रकरण की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि सड़क पर भीख मांगने से डांस करके पैसे कमाना कहीं ज्यादा बेहतर है। यानी भिक्षावृत्ति निस्संदेह एक शर्मनाक पेशा है, जो देश की छवि खराब कर रहा है।

बिहार राज्य पत्रकार बीमा योजना, 2014'

बिहार में पत्रकारों के लिए 'बिहार राज्य पत्रकार बीमा योजना, 2014' लागू हो गई है. इसके तहत सरकार प्रीमियम राशि का 80 फीसदी भुगतान करेगी जबकि लाभान्वित पत्रकार को 20 फीसदी राशि का भुगतान करना होगा.

उक्त योजना में ग्रुप मेडिक्लेम तथा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा दोनों को शामिल किया गया है. ग्रुप मेडिक्लेम में बीमितों के लिए फ्लोटिंग बेसिस पर पांच लाख रुपये तक तथा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा में भी बीमाधारक को पांच लाख रुपये तक बीमा का प्रावधान किया गया है.

इसमें किसी गैर सरकारी प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक, न्यूज मीडिया के पत्रकार अर्थात् संचार प्रतिनिधि को जो 21 से 70 वर्ष के हैं, न्यूनतम पांच वर्षो का कार्यानुभव रखते हैं तथा न्यूनतम दसवीं पास या समकक्ष हैं, उन्हें शामिल किया गया है.

राज्य सरकार द्वारा लागू इस योजना में पत्रकारों का बीमा वार्षिक रूप से कराया जाएगा एवं प्रत्येक वर्ष विहित प्रक्रिया पूर्वक नवीनीकरण का प्रावधान होगा. इस योजना के तहत बिहार सरकार द्वारा प्रीमियम राशि का 80 फीसदी अंशदान भुगतान किया जाएगा तथा लाभान्वित पत्रकार शेष 20 फीसदी का भुगतान करेंगे.

मातृत्व लाभ कार्यक्रम

17 मई, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मातृत्व लाभ कार्यक्रम को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। यह कार्यक्रम 1 जनवरी, 2017 से देश के सभी जिलों में लागू कर दिया गया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य
(1) मातृत्व लाभ कार्यक्रम नकद प्रोत्साहन के रूप में वेतन हानि के लिए आंशिक क्षतिपूर्ति प्रदान करना जिससे की महिलाएं प्रथम जीवित बच्चे के प्रसव के पूर्व और पश्चात पर्याप्त आराम कर सकें।
(2) प्रदान किए गए नकद प्रोत्साहनों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं (पीडब्ल्यू एंड एलएम) में कुपोषण के प्रभावों नामतः स्टंटिंग (उम्र के हिसाब से लंबाई में कमी), वेस्टिंग (बच्चों की लंबाई की तुलना में कम वजन) और अन्य समस्याओं के प्रभाव को कम किया जा सके।

बजट
कार्यक्रम हेतु 1 जनवरी, 2017 से लेकर 31 मार्च, 2020 तक की अवधि के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अंश का कुल मूल्य 12,661 करोड़ रुपये है।

इसमें 1 जनवरी, 2017 से 31 मार्च, 2020 तक की अवधि के दौरान केंद्र सरकार का हिस्सा लगभग 7,932 करोड़ रुपये है।

लक्षित समूह

इस योजना के अंतर्गत, केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियमित रूप से रोजगार करने वाली अथवा इसी प्रकार की किसी योजना की पात्र महिलाओं को छोड़कर सभी गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्म के लिए तीन किश्तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्साहन देय है।

यह निर्णय लिया गया है कि प्रथम जीवित शिशु के जन्म के लिए केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय तीन किश्तों में पीडब्ल्यू एंड एलएम को 5000 रुपये प्रदान करेगा।

प्रसव के बाद विद्यमान कार्यक्रमों के अंतर्गत मातृत्व लाभ के यथा मंजूर मानदंडों के अनुसार, शेष नकद प्रोत्साहन प्रदान करेगा जिससे की एक महिला को औसतन 6000 रुपये प्राप्त हो सके।

शर्तें और किश्तें

गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को नीचे दी सारणी के अनुसार, निम्नलिखित चरणों में 5000 रुपये का नकद लाभ तीन किश्तों में प्राप्त होगा-

नकद हस्तांतरणशर्तेंराशि (रुपये में)पहली किश्तगर्भावस्था का प्रारंभिक पंजीकरण1000 रुपयेदूसरी किश्तकम-से-कम एक प्रसव पूर्व जांच हुई हो (गर्भवती होने के छः महीने के बाद)2000 रुपयेतीसरी किश्तl शिशु के जन्म का पंजीकरण होने पर

l शिशु को बीसीजी,डीपीटी और हेपेटाइटिस-बी या उसके समतुल्य  या स्थानापन्न पहला चरण प्राप्त हो गया हो।

2000 रुपये

पात्र लाभार्थियों को संस्थागत प्रसव होने पर मातृत्व लाभ कार्यक्रम के अंतर्गत यथा मंजूर मानदंडों के अनुसार, शेष नकद प्रोत्साहन प्राप्त होते रहेंगे जिससे कि औसतन एक महिला को 6000 रुपये मिलेंगे।

माध्यम

इस योजना के अंतर्गत नकद हस्तांतरण प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से होगा।

बिहार राज्य पत्रकार बीमा योजना, 2014'

बिहार में पत्रकारों के लिए 'बिहार राज्य पत्रकार बीमा योजना, 2014' लागू हो गई है. इसके तहत सरकार प्रीमियम राशि का 80 फीसदी भुगतान करेगी जबकि लाभान्वित पत्रकार को 20 फीसदी राशि का भुगतान करना होगा.

उक्त योजना में ग्रुप मेडिक्लेम तथा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा दोनों को शामिल किया गया है. ग्रुप मेडिक्लेम में बीमितों के लिए फ्लोटिंग बेसिस पर पांच लाख रुपये तक तथा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा में भी बीमाधारक को पांच लाख रुपये तक बीमा का प्रावधान किया गया है.

इसमें किसी गैर सरकारी प्रिंट, इलेक्ट्रोनिक, न्यूज मीडिया के पत्रकार अर्थात् संचार प्रतिनिधि को जो 21 से 70 वर्ष के हैं, न्यूनतम पांच वर्षो का कार्यानुभव रखते हैं तथा न्यूनतम दसवीं पास या समकक्ष हैं, उन्हें शामिल किया गया है.

राज्य सरकार द्वारा लागू इस योजना में पत्रकारों का बीमा वार्षिक रूप से कराया जाएगा एवं प्रत्येक वर्ष विहित प्रक्रिया पूर्वक नवीनीकरण का प्रावधान होगा. इस योजना के तहत बिहार सरकार द्वारा प्रीमियम राशि का 80 फीसदी अंशदान भुगतान किया जाएगा तथा लाभान्वित पत्रकार शेष 20 फीसदी का भुगतान करेंगे.





Thursday, 23rd May 2019, 06:09:45 PM

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