वाणिज्यिक बैंको का वर्गीकरण


Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.

वाणिज्यिक बैंको का वर्गीकरण (Classification of commercial banks
 
भारत में वाणिज्यिक बैंको का वर्गीकरण संवैधानिक तथा स्वामित्व के आधार पर किया जाता है संवैधानिक आधार पर वाणिज्यिक बैंको को अनुसूचित तथा गैर अनुसूचित बैंको में विभाजित किया जाता है
अनुसूचित बैंक(सार्वजनिक बैंक) :- ऐसे बैंक जो भारतीय रिज़र्व बैंक की दूसरी अनुसूची में हो, बैंक की प्रदत्त पूँजी 5 लाख रूपए से कम न हो, एक संयुक्त पूँजी कंपनी हो, एकल व्यापारी अथवा साझा फर्म नही इसके अतिरिक्त इन बैको को अपनी जमा का एक अंश रिज़र्व बैंक के पास रखना पड़ता है तथा बैंकिंग अधिनियम 1949 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक के पास समय समय पर विवरण पत्र भेजना पड़ता है इनको सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी कहा जाता है
 
गैर-अनुसूचित बैंक :- ऐसे bank जो रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित हो ये बैंक वैधानिक नगद आरक्षण के अधीन है तथा इनको निश्चित राशि रिज़र्व बैंक के पास न रखकर अपने पास रखने का अधिकार है इनको रिज़र्व बैंक से ऋण की सुविधा प्राप्त नही होती
 
निजी क्षेत्र के बैंक :- जिनका स्वामित्व निजी शेयर होल्डरों के पास होता है निजी क्षेत्र के बैंक कहलाते हैं ये सरकार के नियंत्रण में नही होते हैं परन्तु इनका नियमन सरकार द्वारा बनाये गए कानून के आधार पर होता है 1993 में सरकार ने नर्सिह्मन समिति(1991) की रिपोर्ट के आधार पर निजी क्षेत्र में बैंक स्थापित करने की अनुमति प्रदान कर दी| RBI के 29 अगस्त 2011 में जारी निजी क्षेत्र के बैंको के लिए दिशा निर्देश के अनुसार नया निजी बैंक स्थापित करने के लिए 300 करोड़ रूपए का निवेश करना पड़ेगा बैंको को कम से कम 25% शाखाये बैंक रहित ग्रामीण क्षेत्र में खोलनी पड़ेगी इसके लिए जनगणना के आधार पर 9999 लोगो की जनसँख्या को आधार माना गया है
 
निजी क्षेत्र में स्थानीय क्षेत्र बैंक :- क्षेत्र विशेष की साख सम्बंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र में स्थानीय क्षेत्र के बैंक स्थापित करने की अनुमति दे दी है इन बैंको की चुकता पूँजी 5 करोड़ रूपए होगी यह बैंक एक दुसरे से लगे हुए तीन जिलो में ही अपनी शाखाएं स्थापित कर सकेंगे | अभी तक RBI ने 3 स्थानीय निजी क्षेत्र के बैंको को अनुमति दी है यह बैंक आन्ध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तथा कर्नाटक में स्थापित किये जायेंगे |
विदेशी विनिमय बैंक :- जो bank विदेशी विनिमय बिलों का क्रय-विक्रय कर विदेशी व्यापार को सुगम बनाते है विदेशी विनिमय bank कहलाते है इनकी शाखाएं विभिन्न देशो में होती है इन बैंको द्वारा आयातकों तथा निर्यातको को अल्पकालिक वित्त की भी व्यवस्था की जाती है यह साधारण बैंकिंग का कार्य भी कर सकता है
 
              भारत में व्यापारिक बैंको को राष्ट्रीयकरण
जब सरकार निजी क्षेत्र की इकाई खरीदती है तो इसे राष्ट्रीयकरण कहते है 1955 से 1980 तक सरकार ने तीन चरण में व्यापारिक बैंको का राष्ट्रीयकरण किया
 
पहला चरण :- 1 जुलाई 1955 को सरकार ने इम्पीरियल बैंक ऑफ़ इंडिया का नाम बदलकर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया तथा इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया सरकार ने SBI के साथ 8 और छोटे छोटे बैंको का राष्ट्रीयकरण करके उन्हें SBI से सम्बद्ध कर दिया जिन्हें एसोसिएट्स बैंक ऑफ़ SBI के नाम से जाना जाता है
 
इन 8 सहायक बैंको में state bank of bikaner और state bank of jaipur को मिलाकर state bank of bikaner and jaipur कर दिया गया, state bank of saurashtra का जुलाई 2008 में तथा state bank of indore का जून 2009 में SBI में विलय कर दिया गया जिसके बाद SBI समूह में केवल पांच bank ही रह गए






Functions of Commercial Banks


 


वाणिज्यिक बैंकों के कार्य 



The various functions - 



1. Accepting or attracting deposits 


जमा को आकर्षित एवं स्वीकार करना 


 


 a) Savings deposits 


बचत जमा 


b) Demand deposits 


मांग जमा 


c) Fixed deposits


सावधिक जमा 


 


2) Advancing of loans 


ऋण देना 


 


a) Cash credit 


कैश ऋण 


b) Provision of overdraft facilities


ओवरड्राफ्ट की सुबिधा उपलब्ध कराना


 


c) Discounting bills of exchange


बिल ऑफ एक्सचेंज का डिस्काउंट या बट्टा करना.
बिल ऑफ़ एक्सचेंज व्याज विहीन लिखित आदेश है जो एक पक्ष को पूर्व निर्धारित तिथि को एक तय मात्रा में मुद्रा का भुगतान करने के लिए बाध्य करता है.. यह चेक के समान होता है परन्तु इसका भुगतान तीसरे पक्ष को भी किया जा सकता है.


 


3) Creation of money or credit 


मुद्रा या ऋण निर्माण करना - अधिकतर मुद्रा का निर्माण बैंक जमा के रूप में किया जाता है 


 


4) Other functions


अन्य कार्य 


 


 a) Transfer of funds


फंड का हस्तांतरण 


 


b) Agency functions


एजेंसी के रूप में कार्य करना 


ग्राहकों के चेक, ड्राफ्ट, डिविडेंट इकट्ठा करना, इंस्युरेन्स बिल जमा करना 


 


c) General utility services


सामान्य जनउपयोगी सेवा प्रदान करना - बिजली बिल, पानी का बिल 

 


Thursday, 10th Aug 2017, 06:09:13 PM

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