ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, 2017


Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.



नौवां वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2017 का आयोजन चीन के शियामेन शहर में सितम्बर 2017  में संपन्न हुआ  जिसमें पांच सदस्यीय देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों के प्रमुख हिस्सा लिया. ब्रिक्स सदस्यों के अलावा मिस्र, केन्या, ताजिकिस्तान, मैक्सिको और थाईलैंड को शिखर सम्मेलन के विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित थे । 
सम्मेलन  का थीम था - “Stronger Partnership for brighter Future”.
 
शियामेन घोषणापत्र

शियामेन ब्रिक्स सम्मेलन का घोषणा पत्र एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है. इसमें आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई है और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों – लश्कर-ए-तोएबा, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी नेटवर्क का जिक्र शामिल है.
यह पहली बार है जब ब्रिक्स घोषणापत्र में इन आतंकवादी संगठनों का जिक्र किया गया है
घोषणापत्र में कहा गया, “आतंकवाद की सभी रूपों में निंदा की जाती है। आतंकवाद के किसी भी कृत्य का कोई औचित्य नहीं है।”
पाकिस्तान का नाम लिए बगैर घोषणापत्र में कहा गया है, “हम इस मत की पुष्टि करते हैं कि जो कोई भी आतंकी कृत्य करता है या उसका समर्थन करता है या इसमें मददगार होता है, उसे इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।”
 
ब्रिक्स देशों का कहना है कि आतंकवाद करने वाले और इसमें सहयोग देने वालों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
 
घोषणापत्र में आतकंवाद को रोकने और इससे निपटने के लिए देशों की प्राथमिक भूमिका और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए जोर दिया गया कि देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का सम्मान करते हुए आतंक के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।
 
घोषणापत्र में कहा गया है, “हम क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर और तालिबान, इस्लामिक स्टेट (आईएस), अलकायदा और इससे संबद्ध संगठन ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी और हिज्बुल-तहरीर द्वारा की गई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हैं।”

ब्रिक्स देशों ने अपने घोषणापत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से व्यापक अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी गठबंधन की स्थापना करने और इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र की समन्वयक की भूमिका के लिए समर्थन जताने का आह्वान किया।

उन्होंने अपने घोषणापत्र में कहा, “हम जोर देकर कहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार होनी चाहिए। इसमें संयुक्त राष्ट्र का घोषणापत्र, अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी और मानवीय कानून, मानवाधिकार और मौलिक स्वतंत्रता भी शामिल हैं।”
 
शियामेन घोषणापत्र  की अन्य मुख्य  घोषणाएं

(i) भ्रष्टाचार के विरुद्ध सहयोग

 ब्रिक्स देशों के नेताओं ने घोषणा की कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों को समर्थन देने के लिए बचनबद्ध हैं।

घोषणा-पत्र के अनुसार, "हम भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का समर्थन करते हैं, जिसमें ब्रिक्स भ्रष्टाचार रोधी कार्य समूह के जरिए सहयोग बढ़ाना भी शामिल है। इसके साथ ही हम संपत्तियों की वसूली एवं भ्रष्टाचार में वांछित लोगों से संबंधित मामलों में भी सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।" 

घोषणा-पत्र के अनुसार, "अवैध धन, वित्तीय प्रवाह एवं विदेशों में जमा काला धन समेत भ्रष्टाचार संबंधी अन्य गतिविधियां वैश्विक चुनौती हैं, जो आर्थिक वृद्धि और सतत विकास में नकारात्मक असर डालती हैं।"

ब्रिक्स देशों ने कहा कि वे इस संबंध में अपने सहयोग को समन्वित करने की कोशिश करेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संकल्प और अन्य प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी उपायों के आधार पर भ्रष्टाचार से मुकाबला करने और इसे रोकने के लिए एक मजबूत वैश्विक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करेंगे।
 
(ii) संरक्षणवाद का विरोध किया

 ब्रिक्स नेताओं ने दोबारा से पुष्टि की कि वे एक खुली और समावेशी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं और संरक्षणवाद का ढृढ़ता से विरोध करते हैं।

घोषणा-पत्र में कहा गया है, "हम खुली और समावेशी विश्व अर्थव्यवस्था के महत्व पर जोर देते हैं और चाहते हैं कि वैश्वीकरण के फायदे का हिस्सा सभी देशों और लोगों को मिले।" 

घोषणा-पत्र में कहा गया है, "हम संरक्षणवाद का ढृढ़ता से विरोध करते रहेंगे। हम संरक्षणवादी कदमों को वापस लेने और उसे रोकने के लिए अपने मौजूदा संकल्प के प्रति बचनबद्धता दोहराते हैं और हम दूसरे देशों से इस प्रतिबद्धता में शामिल होने के लिए गुजारिश करते हैं।" 

ब्रिक्स देश ने कहा कि वह विश्व व्यापार संगठन के रूप में एक नियम आधारित, पारदर्शी, भेदभाव रहित, खुली और समावेशी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के लिए ढृढ़ता से प्रतिबद्ध है। 
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  का सम्बोधन

अपने संबोधन की शुरुआत में गर्मजोशी से स्वागत के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का आभार जताया
मोदी ने तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कहा, "शांति और विकास के लिए सहयोग महत्वपूर्ण है। नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स देशों की मजबूत भागीदारी विकास और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के साथ ही सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) का समर्थन करने में सहायता कर सकती है।"

प्रधानमंत्री ने स्मार्ट शहरों, शहरीकरण और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हम स्वास्थ्य, स्वच्छता, कौशल, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और गरीबी उन्मूलन के मिशन पर हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश सौर ऊर्जा एजेंडे को मजबूत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि यह किफायती, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा हमारे देशों के विकास के लिए बेहद जरूरी है। 

मोदी ने कहा, "अक्षय ऊर्जा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।"

लोगों के बीच आदान-प्रदान में तेजी लाने की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि इस तरह के परस्पर मेल-मिलाप ने हमारे संबंधों को मजबूत किया है। 
उन्होंने कहा कि अनिश्चितता की तरफ बढ़ रहे विश्व में ब्रिक्स ने सहयोग, स्थिरता और विकास का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है।

प्रधानमंत्री ने कौशल, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण और संचार के क्षेत्र में ब्रिक्स और अफ्रीकी देशों के बीच क्षमता निर्माण में सहयोग का स्वागत किया।
मोदी ने कहा, "हमारे केंद्रीय बैंकों को अपनी क्षमताओं को और मजबूत करना चाहिए और कॉन्टिजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (ब्रिक्स बैंक) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।"

उन्होंने विकासशील देशों की संप्रभुता और कॉर्पोरेट संस्थाओं के वित्तपोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी के गठन का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने उत्पादकता गुणक के रूप में महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, "आज हमारे प्रयासों ने कृषि, संस्कृति, पर्यावरण, ऊर्जा, खेल और आईसीटी (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) के विभिन्न क्षेत्रों को स्पर्श किया है।"

ब्रिक्स (BRICS)  के बारे में

ब्रिक्स पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का समूह है जहां विश्वभर की 43% आबादी रहती है, जहां विश्व का सकल घरेलू उत्पाद 30% है और विश्व व्यापार में इसकी 17% हिस्सेदारी है।
आदिवर्णिक शब्द ब्रिक का पहली बार प्रयोग वर्ष 2001 में गोल्डमैन साक्स ने अपने वैश्विक आर्थिक पत्र “द वर्ल्ड नीड्स बेटर इकोनोमिक ब्रिक्स्” में किया था, जिसमें इकॉनोमीट्रिक विश्लेषण के आधार पर यह अनुमान लगाया गया कि आने वाले समय में ब्राजील, रूस, भारत एवं चीन की अर्थव्यवस्थाओं का व्याक्तिगत और सामूहिक रूप से विश्व के आर्थिक क्षेत्रों पर नियंत्रण होगा और अगले 50 वर्षों में ये विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से होंगी।

एक औपचारिक समूह के रूप में सेंट पीटर्सबर्ग में जुलाई 2006 में जी-8 आउटरीच शिखर सम्मेलन के अवसर पर रूस, भारत तथा चीन के नेताओं की बैठक के पश्चात ब्रिक का प्रारम्भ किया गया था। न्यूयॉर्क में सितम्बर 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अवसर पर ब्रिक समूह के विदेश मंत्रियों की प्रथम बैठक के दौरान ब्रिक को औपचारिक रूप प्रदान किया गया। ‘ब्रिक’ के पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन का आयोजन रूस के येकातेरिनबर्ग शहर में 16 जून, 2009 को किया गया।
सितम्बर 2010 में न्यूयॉर्क में ब्रिक विदेश मंत्रियों की बैठक में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करके ब्रिक को ब्रिक्स में विस्तार करने पर सहमति बनी थी। तद्नुसार, दक्षिण अफ्रीका 14 अप्रैल, 2011 को सान्या, चीन में आयोजित तीसरे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुआ।

अब तक नौ ब्रिक्स सम्मेलन हो चुके हैं।10वां शिखर सम्मलेन 2018  में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में होगा.



Sunday, 10th Sep 2017, 08:29:56 PM

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