बजट 2018-19


Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.

                                       बजट 2018-19 
वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने संसद के पटल पर आम बजट 2018-19 प्रस्तुत किया। आम बजट में कृषि, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, एमएसएमई और बुनियादी ढांचागत क्षेत्रों को मजबूत करने के मिशन पर फोकस। सरकार ने कहा, अनेक ढांचागत सुधारों की बदौलत भारत भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओँ में शुभार हो जाएगा। विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों में विकास के पटरी पर वापस आ जाने से भारत अब 8 प्रतिशत से भी अधिक की आर्थिक विकास दर हासिल करने की दिशा में मजबूती से अग्रसर हो गया है।
 
कृषि
न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ गुना बढ़ाने का ऐलान किया गया है। किसान का कर्ज लेना आसान बनाएंगे। किसानों के कर्ज के लिए 11 लाख करोड़ रुपए का फंड अलॉट किया गया है। आर्थिक सुधार पर सरकार ईमानदारी से काम कर रही है। जरूरतमंदो तक सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। अनाज का उत्पादन रिकॉर्ड पर है। 27.5 करोड़ टन अनाज का उत्पादन हुआ है। सभी फसलों का समर्थन मूल्य मिलेगा अभी कुछ ही फसलों का मिलता है। नया ग्रामीण बाजार ई-नैम बनाने का ऐलान किया। खरीफ की फसल का समर्थन मूल्य उत्पादन की लागत से डेढ गुना है। आलू, प्याज और टमाटर के लिए ऑपरेशन ग्रीन चलाया जाएगा। आलू, प्याज, टमाटर के लिए 500 करोड़ रुपए मिलेंगे। किसान क्रेडिट कार्ड पशु पालकों को भी मिलेगा। 42 मेगा फूड पार्क बनाए जाएंगे।
लागत से डेढ़ गुना कीमत पर सरकार खरीदेगी उपज: वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट की सबसे पहली खास बात जो रही, वह यह कि उन्होंने खेती-किसानी से जुड़े लोगों के ​लिए बड़ी राहत का एलान किया है। सरकार अब आने वाले वर्षों में किसानों से की जाने वाली फसलों की खरीद, उत्पादन लागत से कम से कम डेढ़ गुना कीमत पर करने का फैसला किया है। साथ ही वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर भी प्रतिबद्धता जताई।
सरकार खुद वहन करेगी बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य का अंतर: फसल लागत से डेढ़ गुना कीमत किसानों को मिल सके, यह ​सुनिश्चित करने के लिए सरकार उस फसल के बाजार मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में अंतर को खुद वहन करेगी। दोनों में अंतर होने की स्थिति में बाकी का पैसा सरकार की ओर से किसानों को मिलेगा। नीति आयोग इस संबंध में जरूरी सिस्टम व प्लेटफॉर्म विकसित करेगा।
टमाटर, आलू, प्याज का उत्पादन बढ़ाने के लिए ”आपरेशन ग्रीन”: टमाटर, आलू और प्याज जैसे कॉमन रूप से उपयोग में आने वाली खाद्य वस्तुओं के लिए ‘ऑपरेशन ग्रीन’ लॉन्च करने की घोषणा की गई है। यह दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में चलाए गए ‘ऑपरेशन फ्लड’ की तर्ज पर काम करेगा। इसके लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। औषधीय उत्पादों के निर्माण में प्रयोग होने वाले पौधों के उत्पादन और जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। बांस की पैदावार बढ़ाने के लिए 1200 करोड़ का फंड बनाया जाएगा।
 
22000 ग्रामीण कृषि बाजार विकसित किए जाएंगे: 86 प्रतिशत छोटे एवं सीमांत किसानों के कारोबारी हितों में सुधार लाने के लिए 22,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि बाजारों के रूप में विकसित एवं उन्नत किया जाएगा। इसके अलावा किसानों के कल्याण के लिए 11 लाख करोड़ का फंड भी बनाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा सुगम बनाने के लिए 5 लाख वाई-फाई हॉट स्पॉट स्थापित किए जाएंगे।
 
मछुआरों और पशुपालकों को भी मिलेंगे क्रेडिट कार्ड: मछली पालन और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए 10 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। किसान क्रेडिट कार्ड की तरह मछुआरों और पशुपालकों को भी क्रेडिट कार्ड मिलेंगे।
 
कृषि संबंधि​त सामान बनाने वाली कंपनियों को टैक्स छूट: कृषि से संबंधित सामान बनाने वाली कंपनियों को भी टैक्स में राहत दी गई है। सौ करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाली किसान उत्पादक कंपनियों के लाभ पर अगले पांच वर्षों तक 100 प्रतिशत कर कटौती का लाभ मिलेगा। इससे इन कंपनियों की उत्पादन लागत घटेगी और किसानों को कृषि उपकरण व अन्य उपयोगी चीजें सस्ते दामों पर मिल सकेंगी।
 
 
50 करोड़ लोगों के लिए 5 लाख की चिकित्सा बीमा योजना
इस बजट में अरुण जेटली ने दुनिया में सबसे बड़ी हेल्थकेयर स्कीम (50करोड़ की आबादी के लिए) राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों और चुनिंदा प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज (बिना पैसा जमा किए) की सुविधा उपलब्ध होगी।
इस योजना की तुलना अमेरिका की ”ओबामाकेयर” से की जा रही है। प्रति परिवार सदस्यों के हिसाब से इस योजना से हर साल कम-से-कम 50 करोड़ लोग लाभान्वित हो सकेंगे। यानी कि देश की करीब 40 प्रतिशत आबादी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का फायदा उठा सकेगी।
10 करोड़ परिवारों के हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के हिसाब से 2000 करोड़ का आवंटन किया गया है। यह योजना 2008 में शुरू हुई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की जगह लेगी, जिसमें गरीबी रेखा के नीचे रह रहे परिवारों के लिए 30 हजार रुपए की सालाना बीमा सुरक्षा दी गई थी। यह योजना नए वित्त वर्ष की शुरुआत से यानी कि 1 अप्रैल 2018 से लागू होगी।
 
1.50 लाख हेल्थ सेंटर बनेंगे
इसके अलावा सरकार ‘आयुष्मान भारत’ कार्यक्रम के तहत देशभर में 1.50 लाख हेल्थ सेंटर बनाएगी, जिनमें लोगों को दवा और जांच की मुफ्त सुविधा प्रदान की जाएगी। हेल्थ वेलनेस केंद्र बनाने के लिए 1200 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है।
 
उज्ज्वला योजना  से 8 करोड़ गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन
सरकार ने पिछले बजट में उज्ज्वला योजना के तहत 5 करोड़ गरीब महिलाओं तक मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। 2018 के बजट में इस लक्ष्य को बढ़ाकर 8 करोड़ गरीब महिलाओं तक मुफ्त गैस कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाली ऋण राशि को पिछले साल के 42,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2018-2019 के लिए 75,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
 
सौभाग्य योजना से 4 करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन
सरकार सौभाग्य योजना के तहत इस साल 4 करोड़ लोगों को मुफत बिजली उपलब्ध कराएगी। इस योजना का पूरा नाम ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ है, जिसके तहत 31 मार्च 2019 तक देश के हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
 
शहरी क्षेत्र के गरीबों के लिए बनेंगे 37 लाख नए मकान
शहरी क्षेत्र के गरीबों को घर उपलब्ध कराने की दिशा में भी वित्त मंत्री ने बड़ा ऐलान किया है। इसके तहत नए साल में 37 लाख मकान बनाए जाएंगे। इसके अलावा नए वित्त वर्ष में सरकार ने 2 करोड़ शौचालय बनाने का भी लक्ष्य रखा है।
70 लाख नई नौकरियों के अवसर पैदा किए जाएंगे
बजट 2018 में युवाओं के लिए 70 लाख नई नौकरियों के सृजन की घोषणा की गई है। टेक्सटाइल, लेबर और फुटवियर के क्षेत्र में वर्ष 2020 तक 50 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुद्रा योजना के लिए 3 लाख करोड़ के फंड की घोषणा की गई है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना कारोबार शुरू करने में आर्थिक मदद मिल सके।
 
1000 बीटेक छात्रों को मिलेगी प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप
सरकार इंजीनियरिंग क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री रिसर्च फेलो स्कीम शुरू करेगी। इसके ​तहत 1000 बीटेक छात्र चुने जाएंगे और उन्हें आईआईटी से पीएचडी करने का अवसर दिया जाएगा।  18 नई आईआईटी और एनआईआईटी की स्थापना की जाएगी। और जिला स्तर के मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों को अपग्रेड कर 24 नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाए जाएंगे।
 
आदिवासियों के लिए बनेंगे आवासीय एकलव्य स्कूल
सरकार ने इस बाद जनजातीय आबादी की शिक्षा पर जोर देने का फैसला किया है। देश भर में स्थित ऐसे ब्लॉक जहां पर आदिवासियों की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है, वहां पर आदिवासियों के लिए आवासीय एकलव्य स्कूलों की स्थापना की जाएगी। नवोदय स्कूलों की तरह यहां पर रहकर आदिवासी छात्र अध्ययन कर सकेंगे। वर्ष 2022 तक इन स्कूलों को बनाने और पढ़ाई शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है।
13 लाख से ज्यादा शिक्षकों को ट्रेनिंग दिए जाने का लक्ष्य निश्चित किया गया है। इसके लिए तकनीकी डिजिटल पोर्टल ‘दीक्षा’ से मदद ली जाएगी।
 
”मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के लिए कस्टम डयूटी में बढ़ोतरी
खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहनों के कलपुर्जों, फुटवियर फर्नीचर वगैरह में ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए बाहर से आने वाले सामान पर कस्टम डयूटी (सीमा शुल्क) बढा दी गई है। कस्टम डयूटी यानी सीमा शुल्क एक प्रकार का टैक्स होता है। यह विदेश से आयात होने वाले सामान पर लगाया जाता है।
 
मोबाइल फोन पर 20 प्रतिशत हुई कस्टम ड्यूटी
मोबाइल फोन पर कस्टम ड्यूटी को मौजूदा 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। वहीं मोबाइल फोन के विशिष्ट हिस्से, पुर्जों और एसेसरीज पर कस्टम डयूटी मौजूदा 7.5-10 फीसदी से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई है। स्मार्ट घड़ियों और पहनने वाले इलेक्ट्रानिक उपकरण पर भी इंपोर्ट ड्यूटी दोगुना बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गयी है।
 
टीवी और और आॅटो पार्टस पर 15 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी
टीवी के कुछ पार्ट पर भी ड्यूटी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई है। मोटर वाहन, कार, मोटर साइकिल आदि के कुछ एसेसिरीज पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई है। सिल्क फाइबर और फुटवियर पर कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गई है।इसी तरह 10 से ज्यादा सेक्टर की कई वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है।
 
हालांकि, कस्टम डयूटी बढ़ाने से बहुत से उपभोक्ता और लग्जरी सामानों के महंगा होने की संभावना है। क्योंकि मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक, आर्टिफिसियल ज्वेलरी, सौंदर्य प्रसाधन और आॅटो पार्टस संबंधी सामान बडी मात्रा में चीन व अन्य देशों से मंगाया जाता है। लेकिन फूड प्रोसेसिंग, वाहनों के स्पेयर पार्ट्स और फुटवियर जैसे क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और देश में रोजगार की संख्या भी बढ़ेगी।
 
रेलवे:
हर डिब्बे में होगा वाई-फाई, हर बड़े स्टेशन पर स्केलेटर्स
पिछले दो बजटों से (बजट 2017 से) रेलवे बजट भी आम बजट का हिस्सा बन गया है। इस बार भी सरकार ने रेलयात्रियों की सुख-सुविधाएं बढ़ाने और रेलयात्रा संचालन में सुधार जैसी तमाम घोषणाएं की हैं। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वित्त वर्ष 2018-19 में रेलवे को 1,48,528 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। भारतीय रेलवे में बदलाव संबंधी कुछ प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं—
- सभी ट्रेनों को वाई-फाई, सीसीटीवी और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
- देशभर में 36000 किमी की नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। मुंबई लोकल ट्रेन नेटवर्क का 90 किमी तक विस्तार किया जाएगा। देश का पूरा रेल नेटवर्क ब्रॉडगेज होगा और 2019 तक सभी मानवरहित क्रॉसिंग हटा ​दिए जाएंगे।
- प्रतिदिन 25 हजार से ज्यादा यात्री क्षमता वाले रेलवे स्टेशनों पर उतरने-चढ़ने के लिए एस्केलेटर्स (इले​क्ट्रॉनिक ​सीढ़ियां) बनाए जाएंगे। देश भर के 600 बड़े रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का काम जारी है।
 
सड़क और हवाई परिवहन के लिए भारी बजट
2018-19 में परिवहन क्षेत्र के लिए 1,34,572 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इस क्षेत्र के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत 35 हजार किमी सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
सरकार की महत्वाकांक्षी ‘उड़ान योजना’ के तहत ऐसे 56 हवाईअड्डों और 31 हेलीपैडों को भी वायु परिवहन में जोड़ा जाएगा, जो अब तक बहुत कम इस्तेमाल में थे। ​इससे ज्यादा से ज्यादा आबादी तक हवाई सेवाओं को पहुंचाने में मदद मिलेगी। प्रति वर्ष 100 करोड़ उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए हवाईअड्डों की क्षमता को 5 गुना करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
 
”डिजिटल इंडिया” के लिए दोगुना हुआ बजट
सरकार ने ज्यादा से ज्यादा आबादी तक इंटरनेट सेवाओं की पहुंच बनाने के लिए ”डिजिटल इंडिया कार्यक्रम” के लिए आवंटन को दोगुना कर 3,073 करोड़ रुपये कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक आसानी से पहुंचाने के लिए 5 लाख वाई-फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जाएंगे। दूरसंचार के क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे के निर्माण और विस्‍तार के लिए भी 10 हजार करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।
 
रक्षा क्षेत्र को मिले 2.82 लाख करोड़ रुपए
सरकार ने रक्षा बजट पर खर्च को 2.67 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2.82 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। ये 2018-19 के संभावित जीडीपी का लगभग 1.58 फीसदी है। पिछले वर्ष के मुकाबले रक्षा बजट में 7.81 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। सरकार नए साल में सरकार दो ”डिफेंस इंडस्ट्री प्रोडेक्शन कॉरिडोर” का विकास करेगी और रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सैन्य उत्पादन नीति भी बनाएगी।
 
इनकम टैक्स स्लैब में नहीं हुआ कोई बदलाव
जैसा कि तमाम आर्थिक विशेषज्ञ अनुमान जता रहे थे कि इस बार के बजट में मोदी सरकार टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी करके छोटे करदाताओं को बड़ी राहत देगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अरुण जेटली ने इस साल भी पिछले कई साल के ही टैक्स स्लैब को जारी रखने का फैसला किया है। 
 
नौकरीपेशा को टैक्स में 40 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा
सरकार ने नौकरी पेशा लोगों को Standard Deduction के माध्यम से जरूर 40000 रुपए तक की आमदनी को सेलरी से घटाकर टैक्स की गणना करने की सहूलियत दी है। 
 
शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए चुकाना होगा 4 प्रतिशत सेस
सरकार ने नए वित्त वर्ष यानी अप्रैल 2018 से करदाताओं पर 4 प्रतिशत Education And Health Cess लगाने का फैसला किया है। यह सेस पहले से जारी एजुकेशन सेस के स्थान पर लाया गया है। अभी तक कुल 3 प्रतिशत एजुकेशन सेस दो हिस्सों में जमा होता था। 2 प्रतिशत education cess (बेसिक शिक्षा के लिए) और 1 प्रतिशत senior secondary education cess (उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के लिए)। इस 3 प्रतिशत में ही 1 प्रतिशत और बढ़ाकर (कुल 4 प्रतिशत) इसमें स्वास्थ्य को भी शामिल कर लिया गया है।
नए सेस का नाम भी Education And Health Cess कर दिया गया है। पहले की तरह 2 और 1 प्रतिशत अलग-अलग जमा करने की बजाय अब एकसाथ सीधे 4 प्रतिशत सेस जमा करना होगा। बाद में सरकार अपने हिसाब से इसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर सकेगी। यह सभी वर्गों के करदाताओं पर समान रेट से लागू होगा।
सेस, दरअसल टैक्स के ऊपर एक टैक्स होता है जो पहले से बन रहे टैक्स के कुछ प्रतिशत के रूप में होता है।
 
वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50 हजार तक की ब्याज टैक्स फ्री
सीनियर सिटिजन्स (60 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों) को बैंक या पोस्ट आॅफिस में जमा पर मिलने वाले 50,000 रुपए तक के ब्याज को टैक्स फ्री कर दिया गया है। पहले 10,000 रुपए तक के ब्याज पर टैक्स नहीं देना पड़ता था। सेविंग अकाउंट के अलावा एफडी या आरडी से मिले ब्याज पर भी छूट का यह नियम लागू होगा।
 
प्रधानमंत्री वय वंदना योजना की अवधि और निवेश सीमा बढ़ी
वरिष्ठ नागरिकों के लिए, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना की अवधि को बढ़ाकर मार्च 2020 तक करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत निवेश सीमा को 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने का भी प्रस्ताव है। पहले यह योजना 4 मई 2017 से 3 मई 2018 तक उपलब्ध थी। प्रधानमंत्री वय वंदना योजना भारत सरकार की पेंशन योजना है, जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए है। इसे भारतीय जीवन बीमा निगम के माध्यम से संचालित किया जाता है। इसमें जमा रकम पर ब्याज के आधार पर 10 साल तक पेंशन मिलती है। मासिक पेंशन चुनने पर 8 प्रतिशत और वार्षिक पेंशन चुनने पर 8.3 प्रतिशत ब्याज मिलती है।
 
बुजुर्गों के इलाज में खर्च पर टैक्स छूट की सीमा में बढ़ोतरी
इसके अलावा सेक्शन 80D के तहत वरिष्ठ नागरिकों को हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और सामान्य चिकित्सा खर्च पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा भी 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। सेक्शन 80 डीडीबी के तहत सीनियर सिटिजन्स (60 से 80 वर्ष) और सुपर सीनियर सिटिजन्स (80 वर्ष से अधिक उम्र) के लिए कुछ विशेष गंभीर बीमारियों पर इलाज पर होने वाले खर्च पर टैक्स कटौती की सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपए तक कर दी गई है। पहले यह सीनियर सिटिजन के लिए 60 हजार और सुपर सीनियर सिटिजन के लिए 80 हजार रुपए थी।
 
एक लाख से ज्यादा लांग टर्म कैपिटल गेन्स पर 10% टैक्स अनिवार्य
वित्त मंत्री ने इस बजट में लांग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स (संपत्ति बेचने पर होने वाले लाभ पर टैक्स) को दोबारा लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। एक लाख रुपये से ज्यादा का ‘लांग टर्म कैपिटल गेन’ होने पर उस पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्स चुकाना पड़ेगा। इस पर अब इंडेक्सेशन (खरीद वर्ष में खर्च की गई रकम की चालू वर्ष के हिसाब से संभावित कीमत निकालना) का फायदा भी नहीं मिल सकेगा। हालांकि 31 जनवरी 2018 तक जिन सौदों पर लांग टर्म कैपिटल गेन हुआ है उनमें पुराने Tax Benefit लागू होंगे। उल्लेखनीय है कि अभी तक इक्विटी शेयर्स और इक्विटी ऑरियंटेड म्यूचुअल फंड्स की बिक्री से होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स को टैक्स से छूट मिलती थी।
 
महिलाओं के लिए पीएफ कटौती घटाकर 8 प्रतिशत की गई
सरकार ने इस साल के बजट में महिला कर्मचारियों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत देने वाला फैसला किया है। अब महिला कर्मियों के लिए उनकी सेलरी से पीएफ कटौती 8 प्रतिशत कर दी गई है। पैसा कम कटने से हर महीने उनके हाथ में ज्यादा सैलरी आएगी। पहले यह करीब 9 फीसदी था। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल नए कर्मचारियों के लिए पीएफ कटौती बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी है। सरकार खुद भी नए कर्मचारियों के पीएफ खाते में 12 फीसदी का योगदान करेगी।
 
लाइफ सर्टिफिकेट देने लिए पेंशनर्स को नहीं लगाने होंगे चक्कर
अब पीएफ पेंशनर्स को हर साल लाइफ सर्टिफिकेट देने के लिए पीएफ दफ्तर का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। नई व्यवस्था में पेंशनर्स देश के किसी भी हिस्से में हो, अपना डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट कुछ मिनटों में पीएफ ऑफिस तक पहुंचा सकते हैं। इससे पहले पिछले वर्ष सरकार ने घोषणा की थी कि पेंशनर्स को हर साल नवंबर से दिसंबर माह के बीच बायोमैट्रिक मशीन पर अपना अंगूठा लगाकर ईपीएफ डिपॉटर्ममेंट को अपना लाइफ सर्टिफिकेट भेजना होगा।
 
आधार के सहारे देश के किसी भी हिस्से में कर सकेंगे प्रमाणित
नई व्यवस्था में, इसके लिए पेंशनर को किसी भी बैंक, कॉमन सर्विस सेंटर या फिर पीएफ ऑफिस में जाना होगा। वहां पर मौजूद बायोमैट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर उसका निशान देना होगा। इसे ही उनका लाइफ सर्टिफिकेट माना जाएगा। इन जगहों पर अंगूठा लगाने के बाद संबंधित व्यक्ति का आधार नंबर डाला जाएगा। इसके बाद पेंशन भुगतान आर्डर नंबर को बैंक अकाउंट नंबर से जोड़ दिया जाएगा। इसके कारण पेंशनर्स को पीएफ दफ्तर का चक्कर लगाना पड़ता था। सरकार की नई घोषणा से, इस समस्या से निजात मिल सकेगी।
             
                               बजट 2018: नई योजनाएं
 
(i) किफायती आवास निधि: केंद्र सरकार राष्ट्रीय आवास बैंक के साथ मिलकर एक समर्पित किफायती आवास निधि बनाएगी। जेटली ने कहा, 'मेरी सरकार राष्ट्रीय आवास बैंक में एक समर्पित किफायती आवास निधि स्थापित करेगी, जिसे प्राथमिकता वाले क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण से धन मुहैया किया जाएगा।' सरकार की योजना है कि 2022 तक सभी के पास अपना एक घर हो। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मौजूदा और अगले वित्त वर्ष में ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ से अधिक घरों का निर्माण किया जा रहा है। 

(ii) मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड: वित्त मंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर मछुआरों और पशुपालकों को भी कार्ड दिए जाने का ऐलान किया है। इससे उन्हें कर्ज मिलने आसानी होगी। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन का कारोबार करने वालों को मदद मिलेगी। इसके अलावा मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की भी आर्थिक सहायता हो सकेगी। 

(iii) आयुष्मान भारत योजना: देश के 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपये के बीमा कवर की योजना का भी ऐलान किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर साल में मिलेंगे। अब तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत साल में 30,000 रुपये का बीमा कवर ही मिलता था। इस लिहाज से यह बड़ा इजाफा है। 

(iv) गोबर-धन योजना: सरकार ने ग्रामीणों के जीवन को बेहतर बनाने के अपने प्रयासों के तहत एक नई योजना गोबर-धन की घोषणा की। जेटली ने आम बजट पेश करते हुए गोबर-धन (गैलवनाइजिंग ऑर्गेनिक बायॉ-एग्रो रिसोर्स धन) योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कंपोस्ट, बायॉ-गैस और बायॉ-सीएनजी में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि समावेशी समाज निर्माण के दृष्टिकोण के तहत सरकार ने विकास के लिए 115 जिलों की पहचान की है। 

(v) उज्ज्वला योजना का विस्तार: मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को मिलने वाले मुफ्त एलीपीजी कनेक्शकों की संख्या को 8 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 

(vi) राष्ट्रीय बांस मिशन: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राष्ट्रीय बांस मिशन का प्रस्ताव भी पेश किया है। इस स्कीम के तहत 1,290 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जाएगी। इससे बांस की पैदावार को एक उद्योग के तौर पर विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लोगों को मदद मिल सकेगी। 

(vii) सौभाग्य योजना: इसके साथ ही सरकार ने ग्रामीण इलाकों में बिजली कनेक्शनों की संख्या को 4 करोड़ परिवारों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। यह स्कीम पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। 

(viii) उड़ान योजना का विस्तार: क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना के तहत क्षमता से कम उपयोग हो रहे 56 हवाईअड्डों और 31 हेलीपैड को जोड़ा जाएगा। इसके अलावा सरकार सालाना एक अरब यात्राओं के लिए हवाईअड्डों की क्षमता पांच गुना बढ़ाएगी। 

(ix) एकलव्य स्कूल: अरुण जेटली कहा कि नवोदय स्कूलों की तर्ज पर 2022 तक अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए एकलव्य स्कूलों की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि 50 फीसदी से अधिक जनजाति वाले क्षेत्रों और 20,000 आदिवासी लोगों वाले प्रत्येक ब्लॉक में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की जाएगी। ये विद्यालय नवोदय विद्यालयों का हिस्सा होंगे और यहां खेल और कौशल विकास में प्रशिक्षण देने के अलावा स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण की भी विशेष सुविधाएं होंगी। 

(x) प्रधानमंत्री फेलोशिप योजना: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट के दौरान पीएम फेलोशिप योजना का भी ऐलान किया। इसके तहत एक हजार बी.टेक छात्रों को आइईआईटी और आईआईएससी में पीएचडी करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। 
 
                                     बजट में अच्छी बातें
1. नैशनल हेल्थ प्रॉटेक्शन स्कीम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना) के तहत अब 10 करोड़ गरीब परिवारों के लिए सालाना 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) का ऐलान किया गया। 
2. खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1.5 गुना वृद्धि। 
3. वरिष्ठ नागरिकों को एफडी और पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट पर (50,000 रुपये तक) टीडीएस नहीं देना होगा। 
4. रेलवे के लिए 1 लाख 48 हजार करोड़ रुपये का आवंटन। पटरी, गेज बदलने के लिए खर्च किया जाएगा रेलवे को जारी किए गए फंड का बड़ा हिस्सा। 
6. मुद्रा योजना के तहत 3 लाख करोड़ रुपये की राशि लोन के तौर पर देने का लक्ष्य। 
7. देश में 99 स्मार्ट सिटीज के विकास पर 2.04 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। 19,428 करोड़ रुपये की लागत से 500 शहरों में पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। 
8. हवाई यात्रा को सरल और सुगम बनाने के लिए एयरपोर्ट्स की संख्या को 5 गुना किया जाएगा। 
9. 70 लाख नए रोजगार देने का सरकार का लक्ष्य। 
10. इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलेगी 40,000 रुपये की छूट। जितनी सैलरी है, उसमें 40,000 रुपये घटाकर टैक्स लगाया जाएगा। 
11. उद्योग जगत को बड़ी राहत। 250 करोड़ तक के टर्नओवर वाली कंपनियों पर लगेगा 25 पर्सेंट कॉर्पोरेट टैक्स। 
12. ऐसे ब्लॉक जहां आदिवासियों की आबादी 50 प्रतिशत से ज्यादा होगी वहां आदिवासियों के लिए आवासीय एकलव्य स्कूलों की स्थापना की जाएगी। ये स्कूल नवोदय की तर्ज पर आवासीय विद्यालय होंगे। 
13. 25,000 से ज्यादा फुटफॉल वाले स्टेशनों में स्केलेटर्स लगेंगे। सभी रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को वाई-फाई और सीसीटीवी से लैस करने की तैयारी। 
14. उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ परिवारों को फ्री एलपीजी गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य। अब तक 5 करोड़ का लक्ष्य था। 
15. गांवों में इंटरनेट के विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये। गांवों में बनेंगे 5 लाख हॉटस्पॉट। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के लिए 3037 करोड़ रुपये का आवंटन होगा। 
                                 बजट में क्या बुरा हुआ
1. इनकम टैक्स दर में कोई बदलाव नहीं। मिडिल क्लास को टैक्स स्लैब में बदलाव या छूट सीमा में वृद्धि की उम्मीद थी। 
2. सरकार ने वित्तीय घाटे को 2018-19 के लिए जीडीपी के 3.5 फीसदी तक बढ़ाने का विकल्प चुना। अधिक वित्तीय घाटा सरकार की विश्वसनीयता और एफडीआई आदि के लिए ठीक नहीं। 
3. बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए टैक्स में कोई कटौती नहीं, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलता और नौकरियों के अवसर भी पैदा होते। 
4. कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद मोबाइल, टीवी महंगे होंगे। इसका सीधा असर स्मार्ट फोन और टीवी पर पड़ेगा। 
5. सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा सेस को 1 फीसदी बढ़ाकर 3% से 4% कर दिया है। इस बढ़ोतरी की वजह से हर बिल में वृद्धि हो जाएगी। 




Monday, 30th Apr 2018, 07:04:56 PM

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