इसरो ने पीएसएलवी सी 38 का सफल लॉन्च किया


Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.

जून 23, 2017, भारत ने आसमान में एक और छलांग लगाई है. श्रीहरिकोटा से लॉन्च किए गए पीएसलवी सी-38 का लॉन्च कामयाब रहा. ये पीएसएलवी की लगातार 39 वीं सफल उड़ान है. इसके ज़रिए भेजे गए कार्टोसैट- 2 सैटेलाइट अपनी कक्षा में पहुंच गया है. ये सैटेलाइट न सिर्फ भारत के सरहदी और पड़ोस के इलाकों पर अपनी पैनी नजर रखेगा बल्कि स्मार्ट सिटी नेटवर्क की योजनाओं में भी मददगार रहेगा. ये सैटेलाइट 500 किमी से भी ज्यादा ऊंचाई से सरहदों के करीब दुश्मन की सेना के खड़े टैंकों की गिनती कर सकता है. भारत के पास पहले से ऐसे पांच सैटेलाइट मौजूद है. जैसे ही यह उपग्रह काम करने लगेगा, उसे रक्षा बलों को सौंप दिया जाएगा। रक्षा बलों के पास अपना सेटअप है, जिसमें कई ग्राउंड स्टेशन और प्रशिक्षित लोग हैं, जो इस सीरीज के उपग्रहों के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं।

पीएसएलवी पर कार्टोसैट-2 के अलावा जो उपग्रह गए हैं, उनमें से 29 नैनो उपग्रह 14 देशों के हैं. ये देश हैं- ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चिली, चेक रिपब्लिक, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, लातविया, लिथुआनिया, स्लोवाकिया, ब्रिटेन और अमेरिका. इसके अलावा एक नैनो उपग्रह भारत का है.

कार्टोसैट 2 श्रृंखला उपग्रह से लिए प्रतिबिंब मानचित्रण अनुप्रयोगों, शहरी और ग्रामीण अनुप्रयोगों, तटीय भूमि के उपयोग और विनियमन, उपयोगिता प्रबंधन जैसे सड़क नेटवर्क का मानीटरण, ​​जल वितरण, भूमि उपयोग के नक्शे का निर्माण,  भौगोलिक और मानव निर्मित विशिष्टता में परिवर्तन का पता लगाने और विभिन्न अन्य भूमि सूचना प्रणाली (एलआईएस) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के अनुप्रयोगों के लिए उपयोग में लिया जाएगा ।

कार्टोसैट-2
- कार्टोसैट-2 रिमोट सेंसिंग उपग्रह है। यह सुरक्षा बलों और वैज्ञानिकों को चिह्नित स्थान का हाई रेजोलूशन तस्वीरें और दृश्य उपलब्ध कराता है। उपलब्ध कराई गई तस्वीरों का उपयोग कार्टोग्राफिक एप्लिकेशन के जरिए चिह्नित इलाके का नक्शा बनाने में किया जाता है। यही नहीं तस्वीरों और दृश्यों से डिफेंस सर्विलांस को विशिष्ट ठिकाने की सटीक जानकारी हो जाती है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल आतंकियों के कैंप, बंकर्स और सैन्य ठिकानों की पहचान में किया जाता है। इसका इस्तेमाल तटीय भूमि उपयोग, जल वितरण, सड़क नेटवर्क की निगरानी में भी किया जाएगा।
- यह उपग्रह तस्वीरें और वीडियो दोनों उपलब्ध करा सकता है।
- यह धरती पर मौजूद 0.6 वर्ग मीटर तक की छोटी वस्तुओं की तस्वीरें ले सकता है। इस सीरीज के पिछले उपग्रह की विभेदन क्षमता 0.8 मीटर की थी। इससे ली गई तस्वीरों ने पिछले साल नियंत्रण रेखा के पार सात आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने में भारत की मदद की थी। 
- यह आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुप्रयोगों में वैज्ञानिकों के लिए भी मददगार होगा।
- कार्टोसैट-2 श्रृंखला के नए उपग्रह का वजन 712 किलोग्राम है।
- मौसमी उपयोगों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
- भौगोलिक और मानव निर्मित भू-बदलावों की पहचान करने में सक्षम है।
- फसली क्षेत्रों की निगरानी में किया जा सकता है इस्तेमाल।
- 500 किलोमीटर की ऊंचाई से दुश्मन के टैंकों तक की गिनती करने में सक्षम।
- स्मार्ट सिटी नेटवर्क की योजनाओं में भी निभा सकता है अहम भूमिका।
 
 
 
 



Friday, 23rd Jun 2017, 06:43:12 PM

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