इनपुट टैक्स क्रेडिट


Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.



जीएसटी में एक स्तर पर चुकाया गया टैक्स, दूसरे स्तर पर चुकाये जाने वाले टैक्स से घटा दिया जाएगा और बिल्कुल अंत में उपभोक्ता पर ही टैक्स लगेगा. उपभोग के पहले के स्तर के टैक्स को इनपुट टैक्स कहा जाएगा और ये आगे के स्तर के लिए क्रेडिट का काम करेगा.

Input credit is a refund available for tax paid while purchasing inputs used in making of a final product.

अब इसे यूं समझ लीजिए:
कच्चे माल की कीमत है 100 रुपये और उस पर जीएसटी की दर है 12 फीसदी, यानी उत्पादक कुल कीमत अदा करेगा 112 रुपये.

अब उत्पादक जो सामान तैयार करता है, उसकी कीमत हो जाती है 120 रुपये और इस पर जीएसटी की दर है 18 फीसदी तो ऐसे में उसे वास्तव में छह फीसदी ही टैक्स चुकाना होगा. यानी सामान की कीमत होगी 127 रुपये 20 पैसे.

Other Example -
उदाहरण के लिए अगर होलसेलर ने एक लाख रुपये का सामान बेच कर(18 पर्सेंट के हिसाब से) 18,000 रुपये टैक्स भरा। अब अगर उसके मैन्यूफैक्चरर ने 90,000 रुपये के सामान पर 16,200 रुपये(18 पर्सेंट के हिसाब से) टैक्स भरा। तो एेसे में होलसेलर को 18,000-16,200= 1800 रुपये ही टैक्स देना होगा और 16000 रुपये उसको इनपुट क्रेडिट के रूप में मिल जाएगा। वहीं, मैन्यूफैक्चरर अपना क्रेडिट रॉ मटिरियल वाले से लेगा। अब रिटेलर वही सामान 1,10,000 रुपये का 18 पर्सेंट जीएसटी के आधार पर बेचेगा तो 19,800 रुपये का टैक्स भरेगा और उसमें से 18000 रुपये(इनपुट क्रेडिट) घटाकर 1800 रुपये का टैक्स भरेगा, जो कि कस्टमर से लेगा। उसे मार्जिन पर टैक्स देना है। असल में जीएसटी वैल्यू एडिशन पर है।

जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट की व्यवस्था का फायदा तभी मिल सकता है जब सभी ने रजिस्ट्रेशन करा रखा हो, कच्चा माल मुहैया कराने वाले से लेकर उपभोक्ताओं को माल बेचने वाला.

– जीएसटी की दरें: 5, 12, 18 और 28 फीसदी. इसके अलावा सोना-चांदी के लिए विशेष दर 3 फीसदी है जबकि मंहगी गाड़ियां, लग्जरी गुड्स वगैरह पर 15 फीसदी की दर से अतिरिक्त सेस लगाने का प्रस्ताव है. सेस से जो कमाई होगी, उसका इस्तेमाल राज्यों को जीएसटी लागू होने की सूरत में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए होगा. उम्मीद है कि सेस से करीब 50 हजार करोड़ रुपये की कमाई होगी.





Tuesday, 04th Jul 2017, 08:21:01 AM

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