इनपुट्स पर GST से किसानों पर बोझ बढ़ेगा


Ajit Kumar AJIT KUMARWISDOM IAS, New Delhi.

जीएसटी की प्रस्तावित व्यवस्था में फसलों की सुरक्षा को बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण आदि से अलग कर दिया गया है। बीजों पर टैक्स छूट दी गई है, उर्वरकों और ट्रैक्टर्स पर 12 पर्सेंट टैक्स लगेगा जबकि फसलों की सुरक्षा में काम आने वाले उत्पादों पर 18 पर्सेंट की दर से टैक्स लगेगा। इससे तो इस इंडस्ट्री से ऐग्रिकल्चर में काम आने वाले दूसरे इनपुट्स से बराबरी का दर्जा ही छीन लिया गया है।

कृषि क्षेत्र मोटे तौर पर जीएसटी से बचा रहेगा, लेकिन खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाले बीज, उर्वरक, कीटनाशक, ट्रैक्टर आदि जैसी चीजों पर कोई भी टैक्स लगने से कृषि उपज के दाम में इजाफा होगा। कृषि उत्पादन की कीमतों पर कंट्रोल बाजार का होता है। किसान का इसमें नाममात्र का दखल होता है। खेती-बाड़ी में काम आने वाली चीजों की कीमत चढ़ने और उत्पादन की कीमतों में ठहराव रहने से किसान के पास इस लागत को बर्दाश्त करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचेगा। इस तरह उस पर बोझ बढ़ेगा। 

भारतीय किसान पहले ही कई मोर्चों पर बेतहाशा दबाव का सामना कर रहा है और टैक्सों का बढ़ा हुआ बोझ उसकी आमदनी में सेंध लगाएगा। अगर उपज की कीमतें किसी तरह बढ़ती भी हैं तो पूरे देश को दिक्कत होगी क्योंकि खाने-पीने के सामान के दाम चढ़ेंगे और इस तरह आम आदमी परेशानी में पड़ेगा। इस तरह इन दिक्कतों से बचने का रास्ता यह है कि फसलों की सुरक्षा में काम आने वाले उत्पादों पर जीएसटी 18 पर्सेंट से घटाकर यथासंभव सबसे निचले स्लैब में कर दिया जाए। इससे सभी ऐग्रिकल्चरल इनपुट्स में समानता आ जाएगी और किसानों पर बोझ भी घटेगा।



Wednesday, 21st Jun 2017, 06:13:33 AM

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